खोने का डर या प्यार
मैंने कई रिश्ते देखे हैं जहाँ रिश्ते की बुनियाद ही डर है. हर इंसान एक आज़ाद आत्मा है जो अपनी इच्छा से इस दुनिया में आई है. अपने इस दुनिया में आने के दिन से लेकर जाने के दिन को भी उसने खुद तय किया है. वो आज़ाद है जितना हम उसे बांधते या काबू करने के कोशिश करते है शायद उतना ही वो खीझती है.
चाहे फिर वो बच्चा हो, एक प्रेमी या माँ बाप भी क्यों ना हो.
हम सभी को प्यार पाना पसंद है पर अगर वो प्यार हमें अपने हिसाब से चलाने लगे तो वो गले में फसने लगता है. जहाँ डर है प्यार वहां नहीं रहता. वह मत जायो लडको से बात मत करो, यह मत पहनो, फ़ोन पे बात मत करो..वगेरह वगेरह ...यह प्यार नहीं खोने का डर है...यह आने वाले कल का डर है..अपनी आँखें बंद कर के एक बेहतरीन कल के बारे में सोचिये.. आपका प्यार आपके अपने को एक सुरक्षा कवच भी दे सकता है. उससे कहिये तुम कहीं भी जाओ , जो भी करो मेरा प्यार तुम्हे हमेशा सुरक्षा देगा.. उस ऊपर वाले पर भरोसा रखो...नाई के हाथ में उस्तरा देख कर क्यों नहीं सोचते की यह मेरी गर्दन काट देगा...नहीं तो फिर उपरवाले पर ही शक क्यूँ.. और अगर मेरे भाग्य में क्या है यह कोई नहीं जानता तो कम से कम उसके बारे में सोचने की क्षमता तो मुझमें है. अगर तुम्हारे मन में पीला रंग है तो हर जगह तुम्हे पीला ही दिखेगा ...ठीक वैसे ही अगर आज सोचना ही है तो क्यों ना अच्छा सोचे ...हर रोज़ कल्पना करे एक बेहतरीन कल की...जो सच में बहुत ख़ूबसूरत है.. कल सुंदर होगा अगर आज सुंदर है तो...और आज अगर दुखी है तो कल यकीकन और भी दुखी मिलेगा..अगर कल ख़ुशी चाहिए तो आज अपने मन में ख़ुशी लानी होगी...वर्ना शायद हम गलत लाइन में खड़े है...नहीं क्या...
Monday, July 26, 2010
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it really gives the inspiration to think positive (good) & do better.
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