एक बार मैं अपने एक दोस्त के साथ एक बैंक गया. काउंटर पर एक घंटे खड़े रहने के बाद जब नंबर आया तो काउंटर पैर बैठी महिला ने बेवजह बहुत रूखे से बात की और सिर्फ जरा सा सवाल पूछने पर चिल्ला पड़ी...मेरा दोस्त भी अपना आप खो बैठा..इससे पहले की कुछ होता..मैंने उसे कोने में बुलाया और बताया..इस महिला की बेटी की शादी एक हफ्ते पहले हुयी थी और शादी के तीन दिन बाद ही लड़के वालों ने उसे घर भेज दिया ...शायद दहेज़ के लिए...यह अपने पति को बहुत पहले ही खो चुकी है..अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित है और दिन बार बैंक में रह कर भी अपने बॉस से डांट खाती है.. यह बहुत दुःख से गुजर रही है . इसके इस व्यहवार के लिए इसे माफ़ कर दो..
मेरा दोस्त शर्मिंदा हुआ और उसने उस महिला से कुछ नहीं कहा. उसके मन में एक अच्छा भाव आ गया और उसे उसका डाटना या रूखे मुहं बात करना अब इतना नहीं चुभ रहा था.
ऐसा कुछ नहीं था. उस महिला की बेटी और पति को मैं नहीं जानता. मगर इतना जरुर जानता हूँ की उसे लोगो से रूखे बात करने का शौक नहीं है. शायद उसके हालात ही ऐसे है.
बुरा कोई नहीं होता सिर्फ हालात बुरे होते है.
लोगों को उनके व्यहवार की बजाये उनकी नीयत या उनकी उस काम को करने के पीछे छुपी वजह से पहचानिए.
हर काम के पीछे वजह हमेशा सकरात्मक ही होती है.
यहाँ तक की चोर भी अपनी चोरी की वजह को सकरात्मक समझता है.
चोरी कर के वो अपने बच्चों को पालना चाहता है या फिर शायद अपने भविष्य की चिंतायों को दूर करने के लिए आज पैसा जोड़ना चाहता है.
अपनों को उनके बात करने के तरीके या उठने बैठने के भाव से न जांचे
उनके उस व्यहवार के पीछे छुपी वजह, प्यार, डर या किसी और भाव की वजह समझे...
हम सब खुश रहना चाहते है पर या तो हमारा मन बीते कल में अटका रहता है ..या आने वाले कल को सोच में अटके रहते है..
प्रिन्स गेरा
Tuesday, July 27, 2010
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