पापा
आप सो रहे है! मुझे लगा ये शायद सही वक़्त नही ,
पर क्या करू अब रुका नही जाता!
अब इस बोझ को खुद पर लेकर कैसे सो पाऊंगा मैं !
किस मिटटी के बने है आप! पराया भी कोई चिल्ला जाए तो दुःख लगता है, पर मैं तो अपना होकर भी आपको बेईज्ज़त करता रहा !
आज आपके पास बैठने आया हूँ ! सब कुछ भूल चूका था मैं !
पर धुंधला सही , सब कुछ याद आ रहा है !
हर बार खाने के टेबल पर थके हारे आते , मुस्कुराते और मेरा हाल हाल पूछते हो आप !
याद है आपको साइकिल चलाते समय कितनी बार गिरता था मैं, पर फिर भी आप सब्र नहीं खोते थे !
सुबह से शाम तक आप भागते हो , हर मेरे कपड़ो के लिए खर्च उठाते हो, पर मुझे याद नही कब अपने लिए कुछ लाये हो आप !
जब छोटा था मैं, तो रातो को रोता था, पर फिर भी अपनी गोद में लेकर घुमाते थे आप मुझको !
कहीं भी जाऊं मैं, आप साया बनकर साथ चलते रहे !
जब भी खाने बाहर गये , हमेशा मेरी पसंद को चुना ! पहले मेरी पसंद का खाने आया और आपने उसी को अपना समझ कर खाया !
मुझे तो याद नही आपने कब अपने लिए कुछ ख़रीदा हो !
आपके सारे सपने मुझसे ही जुड़े है , कभी नहीं कहा की मेरे लिए कुछ बनाकर दिखाओ ! बस यही कहा की जो भी बनना , खुश रहना !
मैं कितना मतलबी हूँ, मैंने कभी आपसे पुछा तक नही की कैसे है आप ??
काश, कभी मैं भी आपके पास बैठता जैसे आप बैठते थे हमेशा मेरे पास !
मेरे पास बैठ कर आप घंटो कहानिया सुनाते, शायद कितनी बार मैं एक सवाल पूछता पर आप फिर भी उतनी ही विनम्रता से जवाब देते !
पापा मैं आप जैसा कभी नहीं बन सकूंगा !
खुशनसीब हूँ जो मुझे आप जैसे पिता मिले !
कभी पसीने से तर-बतर होकर भी आपने मुझे गर्मी महसूस नही होने दी !
ठण्ड की रातो में भी मेरी रजाई पहले डाली !
शायद ही ज़िन्दगी का कोई लम्हा हो जब आप मेरे बराबर खड़े न हुए
और मैं मतलबी सिर्फ अपने बारे मैं सोचता रहा
आप नहीं समझोगे कह कर चिल्लात्ता रहा
और फिर भी वही खड़े रहे मेरे लिए
कभी सामने से प्यार न कर सके तो
तो रात को सोते समय मेरे सर पे हाथ फेर जाते थे आप
क्यूँ नहीं दिखा मुझे वो सब
क्यों दुनिया को ही देखता रहा मैं
क्यों अपने दोस्तों और अपनी खुशियों को अपनी दुनिया समझता रहा
क्यों नहीं दिखा मुझे वोह इंसान जिसकी दुनिया शुरू ही मुझ पर हुई
और शायद ख़त्म भी मुझ पर होगी
एक दिन आएगा जब शायद यह सब कहने के लिए बहुत देर हो जाएगी...
कोई नहीं टोकेगा मुझे मेरी लापरवाहियों के लिए ...
कोई नहीं देगा मुझे सलाह मेरी परेशानियों के लिए ...
पर अब नहीं अब नाम से नहीं लहू से आपका बेटा बन के दिखाऊंगा मैं
आपकी हर ख़ुशी मेरी मंजिल होगी और आपका हर सपना मेरा मुकाम
अब अपनी बाकी की ज़िन्दगी मेरा एक ही सपना होगा
आपके सपनो को पूरा करना
आपका बेटा
prince gera
from the book i intend to write :चंद चिठियाँ ऐसी भी.....
Monday, July 26, 2010
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Amazing sir...This is the truth of the life...i hve never seen my father..i know the importance of the father in my life.So plzz...Respect and take care of ur parents.
ReplyDeleteEven i think same for my Parents.situation goes somwhr else.Patience, i ll nevr loose.
ReplyDeleteand u priyanka.I ll be ur friend always.......aur haan Papa hi tarah daat khani hai toh miscall karna.takecr
nice one bro....write something on pardesi's also....
ReplyDeletehey mr prince iam rishu this side i got to know abbout u n ur blogs via ur student priyanka gupta and i must confess that she did a fantastic work for me by letting me get in2 ur blogs and ur experiences out here .i am completely thrilled to tell u that ur blogs are fantastic .i get elated whenever i read them ..thanks a tonne for doin such a fabulous job n keep the pen workin...rishu an admirer of ur readings
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